Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam Nivashi Gift of culture

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Sindhu Sabhyata Ke Nirmata सिन्धु-सभ्यता के निर्माता एवं निवासी
Sindhu Sabhyata Ke Nirmata सिन्धु-सभ्यता के निर्माता एवं निवासी

Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam nivashi

सिन्धु-सभ्यता के निर्माता एवं निवासी

Sindhu Sabhyata Ke Nirmata सिन्धु-सभ्यता के निर्माता एवं निवासी
Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam nivashi
सिन्धु-सभ्यता के निर्माता एवं निवासी

Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam nivashi सिन्धु-सभ्यता के निर्माता एवं निवासी कौन थे ? यह एक अत्यन्त विवादास्पद विषय है। सिन्धु-सभ्यता के निर्माता भारतीय अर्थात स्थानीय ही थे! अथवा विदेशी यह निर्धारित करना भी एक दुरूह कार्य है। सिन्धु घाटी में प्राप्त कंकालों से आर्य, आग्नेय, भूमध्यसागरीय, द्रविड़ एवं किरात किसी का भी यहां बसना प्रमाणित हो सकता है।

अद्यतन शोध-कार्यों के परिणामस्वरूप प्राप्त तथ्यों के आधार पर सुविज्ञ पुरातत्ववेत्ताओं में अग्रांकित चार मत प्रचलित हैं:           

Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam nivashi

(1) मैसोपोटामिया की संस्कृति की देन – सिन्धु-सभ्यता, मैसोपोटामिया की संस्कृति की देन थी ! इस मत का समर्थन करने वालों में प्रमुख विद्वान गार्डन तथा ह्वीलर हैं, किन्तु इस मत को पूर्णतया स्वीकार करने में अनेक समस्याएं हैं।

(2) बलूची संस्कृति की देन – फेयरसर्विस का मत है कि इस सभ्यता का उद्भव एवं विस्तार बलूची संस्कृतियों का सिन्धु की शिकार पर निर्भर करने वाली किन्हीं वन्य एवं कृषक संस्कृतियों के पारस्परिक प्रभाव के परिणामस्वरूप हुआ।

किन्तु निश्चित एवं अकाट्य प्रमाणों के अभाव में इस मत को स्वीकार करने में भी अनेक समस्याएं हैं।

(3) भारतीय संस्कृति – 1953 में श्री अमलानन्द घोष ने सोथी-संस्कृति से सिन्धु-सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान की सम्भावना व्यक्त की है। रेमण्ड अल्विन, ब्रिजेट अल्विन व धर्मपाल अग्रवाल का विचार है,कि सोथी-संस्कृति सिन्धु-सभ्यता से पृथक नहीं थी, अपितु यह सिन्धु-सभ्यता का ही प्रारम्भिक स्वरूप थी। यद्यपि अधिकांश विद्वान इस मत को स्वीकार करने लगे हैं! किन्तु उल्लेखनीय है कि सोथी एवं सिन्धु-सभ्यता में पर्याप्त सांस्कृतिक विषमता है।

Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam nivashi

(4) आर्य संस्कृति की देन – कुछ इतिहासकारों जिनमें लक्ष्मणस्वरूप पुसाल्कर एवं रामचन्द्रन प्रमुख हैं! का विचार है, कि सिन्धु-सभ्यता आर्यों की ही सभ्यता थी ! तथा आर्य ही इस सभ्यता के जनक थे, किन्तु सिन्धु-सभ्यता को आर्यों की सभ्यता स्वीकार नहीं किया जा सकता। आर्य एवं सिन्धु-सभ्यता में निम्नलिखित प्रमुख भेद थे !

(i) पशु – घोड़े का ज्ञान सिर्फ आर्यों को ही था। आर्य गाय की पूजा करते थे! जबकि सिन्ध-सभ्यता में बैल अधिक सम्माननीय था।

(ii) धातु – आर्य लोहे का प्रयोग करते थे! किन्तु सिन्धु निवासियों को सम्भवतः लोहे का ज्ञान न था।

(iii) नगर एवं ग्राम प्रधान सभ्यताएं – वैदिक आर्यों की ग्रामीण एवं कृषि-प्रधान सभ्यता थी! जबकि सिन्धु-सम्यता नगरीय एवं व्यापार प्रधान थी।

(iv) युद्ध – सिन्धु-सभ्यता के व्यक्ति शन्तिप्रिय थे! जबकि आर्य युद्ध प्रेमी थे।

(v) धर्म – सिन्धु-निवासी मूर्तिपूजक थे! तथा शिवलिंग एवं मातृ पूजा करते थे। आर्य मूर्ति पूजा के विरोधी तथा सूर्य, अग्नि, पृथ्वी, इन्द्र, सोम, वरुण, आदि की मन्त्रों द्वारा पूजा करते थे !

(vi) वेश-भूषा – सिन्धु-निवासी अंगरखे का प्रयोग करते थे! तथा स्त्रियां घाघरा धारण करती थीं। वैदिक आर्य अन्य पोशाक भी धारण करते थे। आर्य रुई के कपड़े भी पहनते थे।

(vii) मनोरंजन के साधन – सिन्धु-निवासी घरों में खेले जाने वाले खेल (Indoor games) पसन्द करते थे! किन्तु आर्यों में बाहरी खेलों (Outdoor games) का अधिक प्रचलन था।

(viii) बर्तन – सिन्धु-निवासी मिट्टी के अत्यन्त सुन्दर बर्तन बनाते थे। आर्यों के बर्तन अत्यन्त साधारण होते थे।

Sindhu Sabhyata Ke Nirmata evam nivashi

उपर्युक्त विभिनताओं के कारण इस मत को स्वीकार नहीं किया जा सकता !सिन्धु सभ्यता के मानव-कंकालों से प्रतीत होता है कि यहां पर विभिन्न प्रजातियों के लोग रहते थे। आर्यों के आगमन से पूर्व ही यहां के निवासियों ने विभिन्न प्रजातियों के सम्पर्क से प्रभावित होकर एक नवीन विकसित सभ्यता का विकास कर लिया।

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