Heat and Thermodynamicsऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी Important topic 2020

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Heat and Thermodynamics ऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी
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 Heat and Thermodynamics

ऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी

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ऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी

Heat and Thermodynamicsऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी ऊष्मा ( Heat) वह ऊर्जा है, जो एक वस्तु से दूसरी वस्तु में केवल तापांतर के कारण स्थानांतरित होती है। ऊष्मा का SI मात्रक जूल है। सामान्यत: ऊष्मा के लिए एक अन्य मात्रक कैलोरी प्रयोग में लाया जाता है।

ताप – ताप वस्तु की वह ऊष्पीय अवस्था है, जिससे ऊष्मा के प्रवाह के दिशा का बोध होता है। ऊष्मा सदैव अधिक ताप वाली वस्तु से कम ताप वाली वस्तु की ओर स्थानांतरित होती है।

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ताप मापन – ताप की माप तापमापी से की जाती है। विभिन्न तापमापियों में निम्नलिखित पैमाने उपयोग में आते हैं !

(i) सेल्सियस पैमाना – ताप के सेल्सियस स्केल पर बर्फ का गलनांक 0°C और जल का क्वथनांक 100°C होता है। (ii) केल्विन पैमाना – केल्विन पैमाने पर बर्फ का गलनांक 273 K तथा जल का क्वथनांक 373 K अंकित होता है। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि सेल्सियस पैमाने पर 0°C का ताप, केल्विन पैमाने पर 273 के बराबर होता है।

अतः केल्विन पैमाने पर ताप = सेल्सियस पैमाने पर ताप+273

⇒ K=C+273

(iii) फॉरेनहाइट पैमाना – इस पैमाने पर गलनांक 32°F तथा जल का क्वथनांक 212°F अंकित होता है।

सेल्सियस एवं फॉरेनहाइट पैमानों में संबंध

यदि कोई ताप सेल्सियस पैमाने पर C तथा फॉरेनहाइट पैमाने पर F

तब    c/5=  f-32/9

ताप परिवर्तन के प्रभाव

ताप बढ़ाकर ठोस को द्रव अवस्था में और द्रव को गैसीय अवस्था परिवर्तित किया जा सकता है। जबकि ताप घटा कर गैस को द्रव अवस्था में और द्रव को ठोस अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है।

(i) गलन – वह प्रक्रम जिसमें गर्म करने पर ठोस पदार्थ द्रव में परिवर्तित होता है, गलन कहलाता है।

वह ताप जिस पर ठोस पदार्थ गलता है और वायुमंडलीय दाब पर द्रव में परिवर्तित होता है ! पदार्थ का गलनांक कहलाता है। जैसे 0°C ताप पर बर्फ पिघलकर जल बनाता है, इसलिए बर्फ का गलनांक 0°C है।

भिन्न-भिन्न ठोसों के भिन्न-भिन्न गलनांक होते हैं। जैसे-बर्फ का गलनांक 0°C है, मोम का गलनांक 63°C है, जबकि लोहे का गलनांक 1535°C है।

किसी ठोस का गलनांक, उसके कणों (परमाणुओं अथवा अणुओं) के बीच आकर्षण बल की माप है। ठोस पदार्थ का गलनांक जितना अधिक होगा, उसके कणों के बीच आकर्षण बल उतना ही अधिक होगा। क्वथन

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(ii) क्वथन – वह प्रक्रम, जिसमें गर्म करने पर द्रव पदार्थ तीव्रता से गैस में परिवर्तित होता है,क्वथन कहलाता है।

वह ताप जिस पर द्रव उबलता है और वायुमंडलीय दाब पर तीव्रता से गैस में परिवर्तित होता है, द्रव का क्वथनांक कहलाता है।

भिन्न-भिन्न द्रवों के भिन्न-भिन्न क्वथनांक होते हैं। जैसे-एल्कोहल का क्वथनांक 78°C है, जल का क्वथनांक 100°C है, जबकि पारे का क्वथनांक 357°C है।

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(iii) संघनन या द्रवण – शीतलन द्वारा गैस या वाष्प को द्रव में परिवर्तित करने का प्रक्रम संघनन या द्रवण कहलाता है। संघनन, क्वथन अथवा वाष्पन का विपरीत प्रक्रम है।

(iv) हिमीकरण – शीतलन द्वारा द्रव को ठोस में परिवर्तित करने का प्रक्रम, हिमीकरण कहलाता है।

हिमीकरण, गलन का विपरीत प्रक्रम है, इसलिए द्रव का हिमांक होता है, जो उसके ठोस रूप का गलनांक होता है। जैसे,बर्फ का गलनांक 0°C है, इसलिए जल का हिमांक भी 0°C है।

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गुप्त ऊष्मा

सामान्यतः जब किसी पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है, तो उस ताप में वृद्धि होती है। हालांकि पदार्थ की भौतिक अवस्था परिवर्तित करने के लिए जब ऊष्मा दी जाती है, तो पदार्थ के ताप में वृद्धि नहीं होती। अतः पदार्थ की अवस्था परिवर्तित करने के लिए उसे दी गई ऊष्मा ऊर्जा, उसकी गुप्त ऊष्मा कहलाती है। गुप्त ऊष्मा दो प्रकार की होती है:

(i) संगलन की गुप्त ऊष्मा

(ii) वाष्पन की गुप्त ऊष्मा

ठोस को द्रव अवस्था में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा संगलन अथवा गलन की गुप्त ऊष्मा कहलाती है। बर्फ के संगलन की गुप्त ऊष्मा 3.34 x 105 जूल प्रति किग्रा. होती है।

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द्रव को वाष्प में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा, वाष्पन की गुप्त ऊष्मा कहलाती है। जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्णा 22.5 x 105 जूल प्रति किग्रा. है।

पदार्थ के शीतलन के लिए 0°C पर जल की अपेक्षा 0°C पर बर्फ अधिक प्रभावी होता है। इसका कारण यह है कि गलन के लिए बर्फ का प्रत्येक किग्रा. पदार्थ से 3.34 x 105 जूल गुप्त ऊष्मा लेता है और इस कारण पदार्थ को अधिक प्रभावी ढंग से ठंडा करता है।

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जब जल, भाप में परिवर्तित होता है, तो वह गुप्त ऊष्मा अवशोषित करता है। प्रयोगों द्वारा यह देखा गया है कि उबलते हुए जल की अपेक्षा भाप द्वारा जलना अत्यधिक असहनीय होता है, यद्यपि ये दोनों ही 100°C के समान ताप पर होते हैं। इसका कारण यह है कि उबलते जल की अपेक्षा भाप में गुप्त ऊष्मा के रूप में अधिक ऊष्मा होती है।

इसलिए जब भाप हमारी त्वचा पर पड़ती है और संघनित होकर जल बनाती है, तो वह क्वथनशील जल की अपेक्षा 22.5 x 105 जूल प्रति किग्रा. अधिक ऊष्मा निकालती है। उबलते हुए जल की अपेक्षा अधिक ऊष्मा उत्सर्जित करने के कारण भाप अधिक असहनीय जलन उत्पन्न करती है।

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ऊर्ध्वपातन – गर्म करने पर ठोस पदार्थों का सीधे वाष्प में और ठंडा करने पर वाष्प का सीधे ठोस में परिवर्तन ऊर्ध्वपातन कहलाता है।

ऊर्ध्वपातन करने वाले पदार्थ हैं- अमोनियम क्लोराइड, आयोडीन, कपूर, नैफ्थलीन इत्यादि।

वाष्पन (Evaporation) – अपने क्वथनांक के नीचे ही किसी द्रव के वाष्प में परिवर्तित होने का प्रक्रम वाष्पन कहलाता है। किसी द्रव का वाष्पन कमरे के ताप पर भी हो सकता है। गीले कपड़े उनमें उपस्थित जल के वाष्पन के कारण ही सूख जाते हैं। पोखरों का जल भी वाष्पन के कारण ही सूख जाता है।

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द्रव का ताप बढ़ाने पर वाष्पन की दर में वृद्धि होती है। किसी द्रव के वाष्पन की दर उसके क्वथनांक पर अधिकतम होती है।

वायु की आर्द्रता जब निम्न होती है, तो वाष्पन की दर उच्च होती है और जल अत्यंत शीघ्र वाष्पित होता है, जबकि वायु की आर्द्रता उच्च होने पर वाष्पन की दर धीमी हो जाती है।

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वाष्पन के कारण शीतलन –

किसी पात्र में भरा द्रव जब वाष्पित होता है, तो वह उस पात्र से वाष्पन की गुप्त ऊष्मा प्राप्त करता है। ऊष्मा खोने के कारण वह पात्र ठंडा हो जाता है।

वाष्पन के कारण शीतलन का एक अच्छा उदाहरण मिट्टी के बर्तनों में जल का ठंडा होना है। मिट्टी के घड़ों की दीवारों में बड़ी संख्या में अत्यंत सूक्ष्म छिद्र होते हैं। कुछ जल लगातार इन छिद्रों से घड़ों के बाहर रिसकर वाष्पित होता रहता है। वाष्पन के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा मिट्टी के बर्तन तथा शेष जल से प्राप्त होती है। इस प्रकार घड़ों में शेष जल ऊष्मा खो देता है और ठंडा हो जाता है।

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ग्रीष्म ऋतु में हमारे शरीर से काफी मात्रा में पसीना निकलता है। सूती कपड़े जल के उत्तम अवशोषक होते हैं और हमारे शरीर से निकले हुए पसीने को अवशोषित कर लेते हैं। इस पसीने का वाष्पन हमारे शरीर को शीतलता प्रदान करता है। पॉलीएस्टर इत्यादि से बने वस्त्र पसीने को अधिक अवशोषित नहीं करते हैं, इससे वे ग्रीष्म ऋतु में हमारे शरीर को ठंडा रखने में असमर्थ होते हैं। अतः ग्रीष्म ऋतु में सूती वस्त्रों को वरीयता दी जाती है।

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पंखा हमारी त्वचा से निकलने वाले पसीने के वाष्पन की दर को बढ़ाता है, जिससे हमें शीतलता की अनुभूति होती है।

डेजर्ट रूम कूलर में शीतलन जल के वाष्पन के कारण होता है। डेजर्ट कूलर गर्म तथा शुष्क दिनों में अधिक शीतलन करता है, क्योंकि गर्म दिन में उच्चतर ताप, जल के वाष्पन की दर को बढ़ाता है।

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